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बुधवार, 18 फ़रवरी 2015

दिल्ली -सम्पूर्ण जनादेश

दिल्ली विधान सभा का परिणाम भारतीय राजनीत में मील का पत्थर साबित होगा। जिस प्रकार जनता ने जाति और धर्म की भेद  से ऊपर उठ कर आम आदमी पार्टी  को चुना वो एक नई शुरुयात् की दस्तक है। दिल्ली विधान सभा चुनाव में जैसी जीत आम आदमी पार्टी को मिली है, ऐसी जीत बहुत कम  दलों को नसीब होती है।  आम आदमी पार्टी जीत रही है इसका अंदाजा तो लग रहा था, लेकिन इतनी बड़ी जीत होगी कि भाजपा को केवल तीन और कांग्रेस का सफाया हो जायेगा इसकी  उम्मीद तो अरविन्द केजरीवाल और उनके साथी नेताओ को भी नहीं था।  इस बार के चुनाव में अरविन्द केजरीवाल एक मझे हुए राजनेता के रूप में नजर आये।  इस बार वो  नेताओं और बिज़नेस  मेन के ऊपर आरोप लगाने की बजाय सकारात्मक चुनाव प्रचार करते दिखे। जहाँ  पिछली गलती  मुख्यमंत्री पद से  इस्तीफा देने के लिए जनता से मांफी माँगी  वहीँ  बिजली पानी और भ्रष्टाचार  को अपने चुनाव प्रचार का मुख्य मुद्दा बनाया। युवाओं को आकर्शित करने के लिए उन्होने फ्री WIFI का वादा भी किया। समाज के हर वर्ग को प्रभावित करने में सफल रहे और उसी का परिणाम 67 MLA के रूप में मिला।  वोट प्रतिशत की बात करें तो 54 % वोट पाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 

    आम आदमी पार्टी को  समर्थन मिला है ओ इतना बड़ा है कि शायद अब अरविन्द केजरीवाल को भी इसके पीछे खड़ी जनता की उम्मीदों से डर लगने लगा है। इतने बड़े मत प्रतिशत का मतलब है कि लगभग सभी वर्गों और क्षेत्रों के मतदाताओं ने भारी उम्मीद बांधकर वोट दिया है। हर वर्ग और हर क्षेत्र की अलग अलग उम्मीद है और इसी के कारण उनकी समस्या शुरू हो। सबसे अच्छी बात है कि  अगले पांच साल तक उनको विधान सभा मैं सततने के लिए विपक्ष नहीं है।  लेकिन अगर ओ जनता की उम्मीदों पर खड़े नहीं उतरे तो, पिछले कुछ टाइम में जिस प्रकार उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से ऊपर उठा है उसको गिरने मैं देर नहीं लगेगी। जिस प्रकार उन्होने अपने घोषणा पत्र में वादों की झड़ी लगा दी है उसको पूरा करने में काफी दिक्कतें आ सकती है।  मुस्किल इस कारन भी आ सकता है की  भ्रष्टाचार को मुद्दा बना कर चुनाव तो जीता जा सकता है लेकिन भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना बहुत ही मुश्किल काम होगा।

 अरविन्द केजरीवाल जनता कि  उम्मीदों पर कितना खड़ा उतरते हैं ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन इस जीत का असर पुरे भारत में देखने को मिलेगा।

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