तमाम एक्जिट पोल के रिपोर्ट से पता चल रहा था कि पश्चिम बंगाल में ममता, असाम में सर्वानन्द और केरल में बाममोर्चा की वापसी निश्चित है। और ऐसा हुआ भी। तमिलनाडु में थोड़ी असमंजस की स्थिति बनी हुयी थी। लेकिन तमिलनाडु के रिजल्ट ने सभी राजनितिक पंडितों को गलत साबित कर जयललिता ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करा दी।
पांच राज्यों का चुनाव परिणाम भाजपा में जैसे नए उर्जा का संचार ला दिया है। ये ऐसे राज्य थे जहाँ भाजपा का कोई खास प्रभाव नहीं था। लेकिन चुनाव परिणाम ने भाजपा के जनाधार को मजबूत किया है और कांग्रेस को कमजोर।
असम में भाजपा को अप्रत्याशित सफलता हाथ लगी। एग्जिट पोल से इसे थोड़ी बहुत बढ़त का अंदाजा लग रहा था लेकिन इस प्रकार कि सफलता की उम्मीद नहीं थी। कांग्रेस और तरुण गोगोई के 15 साल के शासन से जनता को बदलाव चाहिए था। और भाजपा के रूप में उसे अच्छा बिकल्प दिखा। इसकी दस्तक लोकसभा चुनाव के समय ही दिख गया था जब बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। बिहार चुनाव से सिख लेते हुए उन्होंने स्थानिया नेताओं के ऊपर भरोसा दिखाया और मोदी सरकार में युवा और खेल मंत्री सर्वानन्द सोनोवाल को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतारा। सर्वानन्द सोनोवाल और गोगोई के वंशवाद को नकारते हुए बीजेपी का दामन थामने वाले हेमंत विस्व सरमा की जोड़ी ने बीजेपी के कमल को नार्थ ईस्ट में खिला दिया। समय रहते बीजेपी ने असम गन परिषद् और बोडो पीपुल फ्रंट के साथ समझौता किया, उसका भी लाभ मिला। नार्थ ईस्ट के राजनीत पर असम के चुनाव परिणाम का असर आगे देखने को मिलेगा।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जबरदस्त वापसी हुयी है। जनता ने लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन को पूरी तरह नकार दिया है। दीदी ने दो तिहायी बहुमत के साथ वापसी करके एंटी इन्कोम्बेंसी या सरकार विरोधी असर और कांग्रेस लेफ्ट गठबंधन से होने वाले नुकसान को करारा जबाब दिया। बंगाल में माकपा की ऐसी दुर्गति कभी नहीं हुई, वो तीसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई है हाँ कांग्रेस को जरुर फ़ायदा हुआ है। अच्छी बात बीजेपी के लिए है कि वो बंगाल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही है।
केरल माकपा के लिए अच्छी खबर लेकर आई। केरल में 1982 के बाद से यूडीएफ और एलडीएफ सत्ता पर बारी बारी काबिज होती रही है। चुनाव में एलडीएफ ने भ्रष्टाचार को मुख्या मुद्दा बनाया और उसे सफलता भी हाथ लगी। बीजेपी गठबंधन ने भी यूडीएफ गठबंधन को नुकसान पहुंचाते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल हुई। भाजपा के वोट प्रतिशत में वृद्धि हुई है।
दक्षिण भारत के दुसरे राज्य तमिलनाडु में जे। जयललिता ने लगातार दुबारा काबिज होकर इतिहास रच दिया है। अम्मा के राजनीतिक गुरु एम जी रामचंद्रन (एमजीआर) जो लगातार तीन बार मुख्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं, उनकी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता हाशिल की है। तमिलनाडु में 27 साल से चले आ रहे सरकार बदल जाने की परिपाटी को तोडा है। जयललिता को जनकल्याण की योजनायों से ग्रामीण एवं शहरी गरिवों का पूरा समर्थन मिला। करुणानिधि के बेटों के बीच मनमुटाव साथ ही परिवार के सदस्यों का भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारन डीएमके जनता का विश्वास जितने में विफल रही। पुद्दुचेरी से कांग्रेस के लिए अच्छी खबर आई जहाँ 30 में से 17 सीट जीत कर सरकार बनाने जा रही है।
बिहार और दिल्ली की हार के बाद आसाम की जीत ने फिर से बीजेपी कर्यकर्तायो में नया उत्साह भर दिया है। उत्तर प्रदेश के चुनाव पर इसका असर साफ़ दिखने वाला है. कांगेस केवल 6 राज्यों में सीमट कर रह गई है। कमुनिस्ट पार्टी का जनाधार भी खिसक गया है। ममता और जयललिता का इस चुनाव से कद बढ़ा है। क्षेत्रीय दलों के बढ़ते कद को देखते हुए राष्ट्रीय राजनीत में फिर से तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट से इंकार नहीं किया जा सकता है।
पांच राज्यों का चुनाव परिणाम भाजपा में जैसे नए उर्जा का संचार ला दिया है। ये ऐसे राज्य थे जहाँ भाजपा का कोई खास प्रभाव नहीं था। लेकिन चुनाव परिणाम ने भाजपा के जनाधार को मजबूत किया है और कांग्रेस को कमजोर।
असम में भाजपा को अप्रत्याशित सफलता हाथ लगी। एग्जिट पोल से इसे थोड़ी बहुत बढ़त का अंदाजा लग रहा था लेकिन इस प्रकार कि सफलता की उम्मीद नहीं थी। कांग्रेस और तरुण गोगोई के 15 साल के शासन से जनता को बदलाव चाहिए था। और भाजपा के रूप में उसे अच्छा बिकल्प दिखा। इसकी दस्तक लोकसभा चुनाव के समय ही दिख गया था जब बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। बिहार चुनाव से सिख लेते हुए उन्होंने स्थानिया नेताओं के ऊपर भरोसा दिखाया और मोदी सरकार में युवा और खेल मंत्री सर्वानन्द सोनोवाल को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतारा। सर्वानन्द सोनोवाल और गोगोई के वंशवाद को नकारते हुए बीजेपी का दामन थामने वाले हेमंत विस्व सरमा की जोड़ी ने बीजेपी के कमल को नार्थ ईस्ट में खिला दिया। समय रहते बीजेपी ने असम गन परिषद् और बोडो पीपुल फ्रंट के साथ समझौता किया, उसका भी लाभ मिला। नार्थ ईस्ट के राजनीत पर असम के चुनाव परिणाम का असर आगे देखने को मिलेगा।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जबरदस्त वापसी हुयी है। जनता ने लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन को पूरी तरह नकार दिया है। दीदी ने दो तिहायी बहुमत के साथ वापसी करके एंटी इन्कोम्बेंसी या सरकार विरोधी असर और कांग्रेस लेफ्ट गठबंधन से होने वाले नुकसान को करारा जबाब दिया। बंगाल में माकपा की ऐसी दुर्गति कभी नहीं हुई, वो तीसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई है हाँ कांग्रेस को जरुर फ़ायदा हुआ है। अच्छी बात बीजेपी के लिए है कि वो बंगाल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही है।
केरल माकपा के लिए अच्छी खबर लेकर आई। केरल में 1982 के बाद से यूडीएफ और एलडीएफ सत्ता पर बारी बारी काबिज होती रही है। चुनाव में एलडीएफ ने भ्रष्टाचार को मुख्या मुद्दा बनाया और उसे सफलता भी हाथ लगी। बीजेपी गठबंधन ने भी यूडीएफ गठबंधन को नुकसान पहुंचाते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल हुई। भाजपा के वोट प्रतिशत में वृद्धि हुई है।
दक्षिण भारत के दुसरे राज्य तमिलनाडु में जे। जयललिता ने लगातार दुबारा काबिज होकर इतिहास रच दिया है। अम्मा के राजनीतिक गुरु एम जी रामचंद्रन (एमजीआर) जो लगातार तीन बार मुख्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं, उनकी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता हाशिल की है। तमिलनाडु में 27 साल से चले आ रहे सरकार बदल जाने की परिपाटी को तोडा है। जयललिता को जनकल्याण की योजनायों से ग्रामीण एवं शहरी गरिवों का पूरा समर्थन मिला। करुणानिधि के बेटों के बीच मनमुटाव साथ ही परिवार के सदस्यों का भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारन डीएमके जनता का विश्वास जितने में विफल रही। पुद्दुचेरी से कांग्रेस के लिए अच्छी खबर आई जहाँ 30 में से 17 सीट जीत कर सरकार बनाने जा रही है।
बिहार और दिल्ली की हार के बाद आसाम की जीत ने फिर से बीजेपी कर्यकर्तायो में नया उत्साह भर दिया है। उत्तर प्रदेश के चुनाव पर इसका असर साफ़ दिखने वाला है. कांगेस केवल 6 राज्यों में सीमट कर रह गई है। कमुनिस्ट पार्टी का जनाधार भी खिसक गया है। ममता और जयललिता का इस चुनाव से कद बढ़ा है। क्षेत्रीय दलों के बढ़ते कद को देखते हुए राष्ट्रीय राजनीत में फिर से तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट से इंकार नहीं किया जा सकता है।