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| फोटो सौजन्य से जागरण डॉट कॉम |
तमाम अडचनों को पार करता हुआ आर्थिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण माना जाने वाला जीएसटी (GST) यानी वस्तु एवं सेवाकर (Goods and Services Tax) बिल राज्य सभा में सर्वसम्मति से पारित हो गया. इसे देश में आर्थिक सुधारों के लिए सबसे बड़े कदम के रूप में माना जा रहा है. मोदी सरकार के एजेंडे में जीएसटी बिल सबसे ऊपर था. राज्य सभा में इसे सर्वसम्मति से पास करा कर मोदी और जेटली की जोड़ी ने अपने राजनीतिक कौशल का परिचय दिया है.
आज से ठीक 25 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने जो आर्थिक सुधारों का सिलसिला शुरू किया था, जीएसटी को उसके अगले पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है. इसकी प्रस्तावना 16 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लिखी थी.
क्या है जीएसटी (What is GST)
'एक देश एक टैक्स' जीएसटी की मूल भावना है. वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) पूरे देश के लिए एक अप्रत्यक्ष कर है. इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक सामान टैक्स प्रणाली लागु होता है. इससे पुरे देश में एक सामान कर लगेगा. सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल एडिशनल कस्टम ड्यूटी, सेंट्रल सेल्स टैक्स और वैट को हटाकर केवल जीएसटी देना होगा.
अगर कोई कंपनी या कारखाना अपना सामान एक राज्य में बना कर दूसरे राज्य में बेचता है, तो उसे दोनों राज्यों को अलग अलग टैक्स चुकाना पड़ता है, जिससे सामान का मूल्य बढ़ जाता है. जीएसटी लागु होने से सामान के दाम में कमी आएगी. देश में लगभग 17 अप्रत्यक्ष कर लगाये जाते हैं, उनकी जगह केवल जीएसटी लगेगा.
अर्थशास्त्रियों के अनुसार जीएसटी के लागु होने पर अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, रोजमर्रा की कुछ चीजें सस्ती तो कुछ महंगी हो जाएगी. टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, कार जैसे सामान सस्ते हो सकते हैं, वहीं रेडीमेड गारमेंट, मोबाइल का बिल, एसी होटल में खाना खाना जैसे सर्विस टैक्स के दायरे में आने वाली सेवाएं महंगी हो सकती है.
फ़िलहाल बाजार में बिकने वाले सामानों पर केंद्र और राज्य सरकारें अलग अलग टैक्स लगाती है, एक राज्य का टैक्स भी दुसरे राज्य से अलग होता है. अब इन सभी टैक्सों की जगह केवल एक टैक्स लगेगा जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवाकर (Goods and Services Tax)
आज से ठीक 25 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने जो आर्थिक सुधारों का सिलसिला शुरू किया था, जीएसटी को उसके अगले पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है. इसकी प्रस्तावना 16 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लिखी थी.
क्या है जीएसटी (What is GST)
'एक देश एक टैक्स' जीएसटी की मूल भावना है. वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) पूरे देश के लिए एक अप्रत्यक्ष कर है. इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक सामान टैक्स प्रणाली लागु होता है. इससे पुरे देश में एक सामान कर लगेगा. सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल एडिशनल कस्टम ड्यूटी, सेंट्रल सेल्स टैक्स और वैट को हटाकर केवल जीएसटी देना होगा.
अगर कोई कंपनी या कारखाना अपना सामान एक राज्य में बना कर दूसरे राज्य में बेचता है, तो उसे दोनों राज्यों को अलग अलग टैक्स चुकाना पड़ता है, जिससे सामान का मूल्य बढ़ जाता है. जीएसटी लागु होने से सामान के दाम में कमी आएगी. देश में लगभग 17 अप्रत्यक्ष कर लगाये जाते हैं, उनकी जगह केवल जीएसटी लगेगा.
अर्थशास्त्रियों के अनुसार जीएसटी के लागु होने पर अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, रोजमर्रा की कुछ चीजें सस्ती तो कुछ महंगी हो जाएगी. टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, कार जैसे सामान सस्ते हो सकते हैं, वहीं रेडीमेड गारमेंट, मोबाइल का बिल, एसी होटल में खाना खाना जैसे सर्विस टैक्स के दायरे में आने वाली सेवाएं महंगी हो सकती है.
फ़िलहाल बाजार में बिकने वाले सामानों पर केंद्र और राज्य सरकारें अलग अलग टैक्स लगाती है, एक राज्य का टैक्स भी दुसरे राज्य से अलग होता है. अब इन सभी टैक्सों की जगह केवल एक टैक्स लगेगा जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवाकर (Goods and Services Tax)
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| फोटो सौजन्य से twitter |
जीएसटी एक संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) है, इसलिए सरकार को इसे पास करवाने में दिक्कत आ रही थी. संविधान संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है लेकिन राज्य सभा में एनडीए को बहुमत नहीं था. इसलिए सरकार ने इसे विपक्षी दलों से बात करके सर्वसम्मति से पास कराने में सफलता प्राप्त की.
यह विधेयक लोक सभा में पहले पारित हो गया था लेकिन केंद्र सरकार ने इसमें कुछ संशोधन किया है इस संशोधित विधेयक को दुबारा से मंजूरी के लिए लोक सभा में भेजा जायेगा. लोक सभा से पारित होने के बाद इसे 29 में से 16 राज्यों के विधान सभाओं से पारित करवाना पड़ेगा. उसके बाद ये राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जायेगा.
वित्त मंत्री अरुण जेटली इसे 1 अप्रैल 2017 से लागु करवाना चाहते हैं. सरकार को 60 दिन के अन्दर जीएसटी काउंसिल का गठन करना होगा जो टैक्स की दर निर्धारित करने के साथ ही कई अहम् मुद्दों पर इस बिल की रुपरेखा तैयार करेगा.
केंद्र सरकार को यदि जीएसटी 1 अप्रैल, 2017 से लागु करवाना है तो केंद्र को सेंट्रल / इंटीग्रेटेड जीएसटी और राज्य सरकारों को स्टेट जीएसटी से जुड़ा कानून जल्द बनाना होगा.
जिन राज्यों को जीएसटी से नुकसान होगा होगा उस नुक्सान को केंद्र सरकार 5 साल तक भरपाई करेगा.
यह विधेयक लोक सभा में पहले पारित हो गया था लेकिन केंद्र सरकार ने इसमें कुछ संशोधन किया है इस संशोधित विधेयक को दुबारा से मंजूरी के लिए लोक सभा में भेजा जायेगा. लोक सभा से पारित होने के बाद इसे 29 में से 16 राज्यों के विधान सभाओं से पारित करवाना पड़ेगा. उसके बाद ये राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जायेगा.
वित्त मंत्री अरुण जेटली इसे 1 अप्रैल 2017 से लागु करवाना चाहते हैं. सरकार को 60 दिन के अन्दर जीएसटी काउंसिल का गठन करना होगा जो टैक्स की दर निर्धारित करने के साथ ही कई अहम् मुद्दों पर इस बिल की रुपरेखा तैयार करेगा.
केंद्र सरकार को यदि जीएसटी 1 अप्रैल, 2017 से लागु करवाना है तो केंद्र को सेंट्रल / इंटीग्रेटेड जीएसटी और राज्य सरकारों को स्टेट जीएसटी से जुड़ा कानून जल्द बनाना होगा.
जिन राज्यों को जीएसटी से नुकसान होगा होगा उस नुक्सान को केंद्र सरकार 5 साल तक भरपाई करेगा.


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