करीब तीन दशक के इन्तजार के बाद आज बेंगुलुरु में शंख ध्वनि की गूंज के साथ देश का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस को भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया है। आज इंडियन एयरफोर्स और देश के लिए गौरव का दिन है।अपना खुद का लड़ाकू विमान बना कर हम दुनिया के उन गिने चुने देशो की श्रैणी में शामिल हो गए हैं, जो अपने लड़ाकू विमान बनाते हैं। इसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics Limited) बनाया है।
देश में बने पहले लाईट कॉम्बैट विमान (एलसीए) तेजस के बेड़े को 'फ्लाइंग डैगर्स फोर्टी फाइव' नाम दिया गया है, इस बेड़े में दो विमान शामिल है। अगले साल मार्च तक 6 और विमान इस बेड़े में शामिल हो जायेगा। इसके बाद आठ तेजस और इस स्कॉव्ड्रन में शामिल किये जायेंगे।
तेजस 1350 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़कर दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों को टक्कर देने की क्षमता रखता है। यह 50 हजार फीट की ऊँचाई तक उड़ान भर सकता है। इसमें हवा से हवा में अपने दुश्मन पर हमला करने के लिए डर्बी मिसाइल लगा हुआ है, तो जमीन पर दुश्मन को धव्स्त करने के लिए आधुनिक लेजर गाइडेड बम।
अगर ताकत की तुलना करें तो पुराने मिग 21 से कही ज्यादा आगे है और मिराज 2000 को टक्कर दे सकता है। जानकारों का तो यहाँ तक मानना है कि ये चीन और पाकिस्तान के साक्षा उपक्रम से बने जेएफ-17 से कहीं ज्यादा बेहतर है। तेजस ने ढाई हजार घंटे के सफ़र में 3000 से ज्यादा उड़ान भर चूका है। इसका परीक्षण करने वाले सभी पायलट मानना है कि फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम बहुत ही उम्दा है और कलाबाजी में इसका कोई जोर नहीं है।
